Essay on APJ Abdul Kalam in hindi 300 words for Students |

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Essay on APJ Abdul Kalam in hindi 300 words for Students |

एपीजे अब्दुल कलाम

प्रस्तावना

एपीजे अब्दुल कलाम भारत के महान वैज्ञानिक, इंजीनियर, शिक्षक और लेखक थे | यह ऐसे महान वैज्ञानिक थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में समर्पित कर दिया | यह भारत के राष्ट्रपति भी रहे और एक शिक्षक के रूप में भारत के युवाओं के आदर्श भी बने | इन्होंने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा  का परचम लहराया |

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा

अब्दुल कलाम का पूरा नाम डॉ अवुल पाकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम था। अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम् में हुआ था। इनके पिता का नाम जैनुल्लाब्दीन और माता का नाम आशियम्मा था। इनके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी, इसलिए कम उम्र से ही उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ अखबार बांटने का काम शुरू कर दिया | इनकी प्रारंभिक शिक्षा धनुषकोटि के एक प्राथमिक विद्यालय में हुई इनका बचपन आर्थिक कठिनाइयों में बीता ,लेकिन उन्होंने कभी पढ़ाई नहीं छोड़ी।  इन्होंने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज से भौतिकी विषय में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी |

वैज्ञानिक  उपलब्धियां

अब्दुल कलाम एक उच्च कोटि के वैज्ञानिक थे | अब्दुल कलाम का सपना था कि वह वायुसेना के लड़ाकू विमान में पायलट बने, परंतु उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका 1958 में अपनी इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद कलाम को DRDO मे हावर क्राफ्ट  परियोजना पर काम करने का अवसर मिला | इसके बाद कलाम ने इसरो में रहते हुए SLV-3 के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया | उनकी इस उपलब्धि ने भारत को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बना दिया |

1980 में कलाम एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम के निदेशक बने और इस पद पर रहते हुए उन्होंने पृथ्वी, त्रिशूल, नाग और अग्नि जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण और उनके विकास के कार्यों को किया | जिसके लिए उन्हें भारत के ‘मिसाइल मैन ‘ के रूप में जाना जाता है |

जुलाई 1992 से दिसंबर 1999 तक कलाम तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार के पद पर रहे और इस दौरान इन्होंने पोखरण परमाणु परीक्षणों का नेतृत्व किया और भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के रूप में पहचान दिलाई I

राष्ट्रपति के पद पर कलाम

अब्दुल कलाम 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक भारत के राष्ट्रपति के पद पर कार्यरत रहे | इस दौरान उन्होंने देशवासियों को ईमानदारी और निष्ठा का पाठ पढ़ाया तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को एक नवीन पहचान दिलाई |

शिक्षक के रूप में कलाम

राष्ट्रपति पद के कार्यभार से मुक्त होने के बाद भी कलाम ने देश सेवा के कार्य को अनवरत जारी रखा और उन्होंने एक शिक्षक के रूप में देश के युवाओं में वैज्ञानिक प्रतिभा का निर्माण किया | उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान से शिलांग, भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान इंदौर सहित कई विश्वविद्यालयों में अतिथि प्रोफेसर के पद पर कार्य किया |

कलाम की साहित्यिक उपलब्धियां

कलाम न केवल एक उच्च कोटि के वैज्ञानिक थे अपितु एक महान लेखक भी थे | जिन्होंने  2 दर्जन से अधिक पुस्तकों की रचना की | उनकी प्रसिद्ध रचनाएं – इंडिया 20-20, विंग्स ऑफ फायर, इगनाइटेड माइंड्स , मिशन इंडिया आदि है |

पुरस्कार एवं सम्मान

कलाम को उनकी वैज्ञानिक एवं साहित्यिक उपलब्धियों के लिए अनेक पुरस्कार एवं सम्मान दिए गए | डॉक्टर कलाम के 79 वें जन्मदिन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाया गया था। भारत सरकार द्वारा उन्हें 1981 में पद्म भूषण और 1990 में पद्म विभूषण का सम्मान प्रदान किया गया जो उनके द्वारा इसरो और डी आर डी ओ में कार्यों और वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिये भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में  नियुक्त किया गया | 1997 में कलाम साहब को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया जो उनके वैज्ञानिक अनुसंधानों और भारत में तकनीकी के विकास में अभूतपूर्व योगदान हेतु दिया गया था |

वर्ष 2005 में स्विट्ज़रलैंड की सरकार ने डॉक्टर कलाम के स्विट्ज़रलैंड आगमन के उपलक्ष्य में 26 मई को विज्ञान दिवस घोषित किया| नेशनल स्पेस सोशायटी ने वर्ष 2013 में उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान सम्बंधित परियोजनाओं के कुशल संचालन और प्रबंधन के लिये वॉन ब्राउन अवार्ड से पुरस्कृत किया।

कलाम का निधन

27 जुलाई 2015 की शाम अब्दुल कलाम भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलोंग में एक व्याख्यान देने के दौरान उन्हें जोरदार कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) हुआ, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई |

उपसंहार

डॉक्टर अब्दुल कलाम भारत के एक महान वैज्ञानिक थे जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश की सेवा के लिए समर्पित कर दिया | उन्होंने देश को मिसाइल और परमाणु शक्ति के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया| राष्ट्रपति के पद पर रहकर देश को बुलंदियों के शिखर तक पहुंचाने का कार्य किया और एक शिक्षक के रूप में देश के युवा वर्ग मे वैज्ञानिक चेतना का विकास किया | उनके इन कार्यों के लिए देश एवं देशवासी सदैव उनके कृतज्ञ रहेंगे |

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