Essay on Teacher in Hindi | निबंध | निबंध लेखन |

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Essay on Teacher in Hindi | निबंध | निबंध लेखन |

शिक्षक

प्रस्तावना

गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरः

गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः

भारतीय संस्कृति में गुरु या शिक्षक का स्थान ईश्वर से भी ऊपर बताया गया है | शिक्षक वह होता है जो शिक्षा देता है, संस्कार देता है और हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करता है | शिक्षक को राष्ट्र के निर्माता एवं  समाज के एक सजग प्रहरी के रूप में देखा जाता है | अतः शिक्षक का पद एक सर्वाधिक सम्मानित पद है |

प्राचीन काल में शिक्षक का स्थान 

भारतीय संस्कृति शिक्षक के लिए गुरु शब्द का प्रयोग करती है, इस शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है – महान, अर्थात भारत में शिक्षक को महान माना जाता था और समाज में उसे यथेष्ट सम्मान प्रदान किया जाता था | गुरु के चरणों में राजा – महाराजा तक शीश नवाते थे | राजा – महाराजाओं के दरबार में गुरु के लिए उचित स्थान होता था और गुरु की सलाह लिए बिना वह कोई भी महत्वपूर्ण कार्य नहीं करते थे | सामान्य व्यक्ति भी गुरुओं को बहुत सम्मान देते थे | लोगों की यह धारणा थी कि गुरु के बिना ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता है और ज्ञान प्राप्त किए बिना ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती है | सांसारिक एवं आध्यात्मिक दोनों उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए गुरु का होना अनिवार्य है | प्राचीन भारत में लोग गुरुओं को अपने बच्चों का भाग्य निर्माता मानते थे और अपने बच्चों को ज्ञान प्राप्ति के लिए निर्भय होकर गुरु के आश्रम में छोड़ देते थे | गुरु भी उस समय त्यागी एवं संयमी प्रवृत्ति के होते थे | वे लोभ – लालच से दूर  केवल जनकल्याण के लिए शिक्षा देने का कार्य करते थे |

विद्यार्थियों के जीवन में गुरु का स्थान

विद्यार्थियों के जीवन में गुरु का स्थान सर्वोपरि होता है | छोटे-छोटे बच्चे गीली मिट्टी के समान होते हैं,  जिनमें कोई समझ , कोई अनुभव या किसी प्रकार के गुण – अवगुण नहीं होते हैं | गुरु ही वह कुंभकार होता है, जो गीली मिट्टी के समान बच्चों को अपने स्नेह, अपने अनुभव व अपने ज्ञान का उपयोग करके बच्चों को तराशने, उन्हें मजबूती प्रदान करने एवं उन्हें संस्कारित करने का प्रयास करते है | गुरु ही वह व्यक्ति होता है, जो बच्चों को करने योग्य और न करने योग्य कार्यों का भेद समझाता है तथा उन्हें संस्कारित करके सभ्य एवं सुसंस्कृत नागरिक बनाता है |

वर्तमान काल में शिक्षक की स्थिति

आज शिक्षक की स्थिति में तेजी से बदलाव आया है और इसका मुख्य कारण लोगों की विचारधारा में आया परिवर्तन है| आज लोग शिक्षक को एक वेतन भोगी  कर्मचारी मात्र मान कर चलते हैं और उनसे उसी प्रकार का व्यवहार करते हैं| पहले की भांति शिक्षक वर्ग को समाज में सम्मान प्राप्त नहीं हो रहा है और न ही इस वर्ग को जीवन यापन के लिए उचित पारिश्रमिक प्राप्त हो रहा है, जिसके कारण आज शिक्षक समुदाय हताशा और कुंठा से ग्रस्त होता जा रहा है और राष्ट्र के भविष्य निर्माता स्वयं अपने भविष्य को लेकर चिंता के बादलों से घिरता जा रहा है| यह स्थिति किसी भी राष्ट्र के लिए काफी भयावह सिद्ध हो सकती है, क्योंकि यदि अध्यापन व्यवसाय से जुड़े शिक्षक ही हताश और निराश हो जाएंगे तो वे अपने बच्चों में किस प्रकार उत्साह जगा पाएंगे |

उपसंहार

शिक्षक ज्ञान रूपी दिवाकर होता है जो संसार में व्याप्त अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर समाज  को सभ्य, सुसंस्कृत एवं विकासोन्मुख बनाने का कार्य करता है | एक शिक्षक ही है जो बच्चों को तराश कर उन्हें सफल नागरिक बनाने वाला शिल्पकार होता है | एक शिक्षक अपने बच्चों से माता-पिता, मित्र, गुरु एवं भाई की तरह व्यवहार कर, उसे हर परेशानी से निकालकर जीवन जीना सिखाता है | परंतु यह बहुत बड़ी विडंबना है कि आज उसी शिक्षक वर्ग के मान – सम्मान में तेजी से गिरावट आई है और आज का शिक्षक समुदाय आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है | अतः यदि समय रहते इस वर्ग को उचित सम्मान और उचित पारिश्रमिक देने की व्यवस्था नहीं की गई तो निकट भविष्य में इस वर्ग का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा | अतः सरकारों एवं समाज को यह सुनिश्चित करना होगा कि देश के विकास और बच्चों की प्रतिभा को  निखारने वाले शिक्षकों को किस प्रकार उनकी खोई हुई गरिमा वापस दिलाई जा सकती है और कैसे आज के शिक्षकों को पुनः उत्साह एवं कर्तव्य के प्रति समर्पण  की भावना से भरा जा सकता है |

# Essay on Teacher in Hindi

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