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Essay on Women’s Education in Hindi | नारी शिक्षा निबंध | निबंध लेखन 

नारी शिक्षा

 प्रस्तावना

बच्चों में संस्कार जगाना है,

तो नारी शिक्षा को बढ़ाना है |

देश को आगे बढ़ाना है,

तो नारी शिक्षा को अपनाना है ||

महिला और पुरुष मानव समाज रूपी गाड़ी के दो पहिए हैं, यदि इनमें से एक भी पहिया कमजोर रहता है  तो इस गाड़ी का संतुलन बिगड़ जाएगा | अतः दोनों का ही सशक्त एवं मजबूत होना अनिवार्य है और यह मजबूती आती है शिक्षा से, क्योंकि शिक्षित व्यक्ति न केवल अपने परिवार को बेहतर सुख सुविधाएं दे पाता है, अपितु राष्ट्र की उन्नति में भी सहायक सिद्ध होता है | अतः पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की शिक्षा – दीक्षा की भी उचित व्यवस्था की जानी चाहिए |

वैदिक काल में महिला शिक्षा

यद्यपि वैदिक काल में महिलाओं की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी आज उपलब्ध नहीं है, परंतु फिर भी पौराणिक आख्यानो के आधार पर हम कह सकते हैं कि, वैदिक काल में महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का पर्याप्त अधिकार था | वैदिक काल में अपाला, लोपामुद्रा, मैत्री, कात्यायनी आदि अनेक विदुषिय़ां हुई है, जिन्होंने शास्त्रार्थ में समकालीन बड़े-बड़े आचार्यों को भी पराजित कर दिया | यह सिद्ध करता है कि उस समय महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का उचित अधिकार था | वैदिक काल में महिलाओं को सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में  पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त था |

मध्यकाल में  नारी शिक्षा

मध्य काल में नारी शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से गिरावट आने लगी l इसका प्रमुख कारण विदेशी आक्रांताओं द्वारा महिलाओं एवं लड़कियों  को बुरी नजर से देखना था l जिसके चलते माता-पिता  लड़कियों का विवाह छोटी उम्र में करने लगे तथा  उन्हें शिक्षा केंद्रों पर भेजने से कतराने लगे l इस समय लड़कियों का दायरा घर तक सीमित हो गया और यह शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से पिछड़ने लगी l

ब्रिटिश भारत में नारी शिक्षा

ब्रिटिश काल में नारी शिक्षा को लेकर लोगों की विचारधारा में तेजी से परिवर्तन आया | ब्रिटिश समाज में शिक्षित नारियों और राष्ट्र निर्माण में उनकी सहभागिता को देखकर भारत के शिक्षित समुदाय का ध्यान महिला साक्षरता की ओर खींचा और लड़कियों को शिक्षा से जोड़ने के  प्रयास आरंभ हुए l स्वामी दयानंद सरस्वती, राजा राममोहन राय, एनी बेसेंट, ज्योति राव फुले आदि समाज सुधारको ने महिला साक्षरता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया |

आजादी के बाद नारी शिक्षा की स्थिति

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत सरकार तथा राज्य सरकारों ने नारी शिक्षा के क्षेत्र में अनेक महत्वाकांक्षी योजनाओं का शुभारंभ कर , नारी शिक्षा को बढ़ाने का प्रयास किया| लड़कियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए  बालिका समृद्धि योजना , बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ योजना, सीबीएसई उड़ान योजना, सीबीएसई  बालिका प्रोत्साहन योजना, राजश्री योजना, लाडली योजना, माझी कन्या योजना आदि ऐसी महत्वपूर्ण योजनाएं हैं, जिनका उद्देश्य नारी शिक्षा में अभिवृद्धि करना है | आज नारियों की शिक्षा को लेकर समाज काफी सजग हो गया है | जिससे नारी शिक्षा में तेजी से बढ़ोतरी आई है परंतु फिर भी आज भी देश के अंदर  महिलाओं की साक्षरता दर पुरुषों की साक्षरता दर से कम है |अभी भी बहुत से ऐसे पिछड़े क्षेत्र हैं जहां पर महिलाओं की शिक्षा को लेकर के लोग सजग नहीं है| अतः उन क्षेत्रों की महिलाओं को भी शिक्षा से जोड़ना  एक महत्वपूर्ण चुनौती है |

उपसंहार

आजादी के बाद से देश में महिला साक्षरता को लेकर व्यापक योजनाएं चलाई गई हैं, जिनके परिणाम स्वरूप महिला साक्षरता की दर में तेजी से इजाफा हुआ है परंतु अभी भी भारत के बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां की महिलाओं को पढ़ने – लिखने की सुविधा प्राप्त नहीं है| उन क्षेत्रों की लड़कियों को भी  शिक्षा से जोड़ना एक महत्वपूर्ण चुनौती है और ऐसे पिछड़े हुए क्षेत्रों की बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ना तभी संभव हो सकता है, जब सरकार और समाज सम्मिलित रूप से महिला साक्षरता को लेकर के प्रयास करें| अतः यदि हमें एक सभ्य और सुसंस्कृत समाज का निर्माण करना है और देश को प्रगति के पथ पर ले जाना है, तो निसंदेह महिला साक्षरता को बढ़ावा देना ही होगा |

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